Friday, December 17, 2010

स्‍मारक

                                                      आगरे का किला


ताजमहल के उद्यानों के पास महत्‍वपूर्ण 16 वीं शताब्‍दी का मुगल स्‍मारक है, जिसे आगरे का लाल किला कहते हैं। यह शक्तिशाली किला लाल सैंड स्‍टोन से बना है और 2.5 किलोमीटर लम्‍बी दीवार से घिरा हुआ है, यह मुगल शासकों का शाही शहर कहा जाता है। इस किले की बाहरी मजबूत दीवारें अंदर एक स्‍वर्ग को छुपाए हुए हैं। इसमें अनेक विशिष्‍ट भवन हैं जैसे मोती मस्जिद - सफेद संगमरमर से बनी एक मस्जिद, जो एक त्रुटि रहित मोती जैसी है; दीवान ए आम, दीवान ए खास, मुसम्‍मन बुर्ज - जहां मुगल शासक शाह जहां की मौत 1666 ए. डी. में हुई, जहांगीर का महल और खास महल तथा शीश महल। आगरे का किला मुगल वास्‍तुकला का उत्‍कृष्‍ट उदाहरण है, यह भारत में यूनेस्‍को के विश्‍व विरासत स्‍थलों में से एक है।

आगरे के किले का निर्माण 1656 के आस पास शुरु हुआ, जब आरंभिक संरचना मुगल बादशाह अकबर ने निर्मित कराई, इसके बाद का कार्य उनके पोते शाह जहां ने कराया, जिन्‍होंने किले में सबसे अधिक संगमरमर लगवाया। यह किला अर्ध चंद्राकार, पूर्व दिशा में चपटा है और इसकी एक सीधी, लम्‍बी दीवार नदी की ओर जाती है। इस पर लाल सैंड स्‍टोन के दोहरे प्राचीर बने हैं, जिन पर नियमित अंतराल के बाद बेस्‍टन बनाए गए है। बाहरी दीवार के आस पास 9 मीटर चौड़ी मोट है। एक आगे बढ़ती 22 मीटर ऊंची अंदरुनी दीवार अपराजेय प्रतीत होती है। किले की रूपरेखा नदी के प्रवाह की दिशा में निर्धारित होती है, जो उन दिनों इसके बगल से बहती थी। इस का मुख्‍य अक्ष नदी के समानान्‍तर है और दीवारें शहर की ओर हैं।

इस किले में मूलत: चार प्रवेश द्वार थे, जिनमें से दो को आगे चलकर बंद कर दिया गया। आज दर्शकों को अमर सिंह गेट से प्रवेश करने की अनुमति है। जहांगीर महल पहला उल्‍लेखनीय भवन है जो अमर सिंह प्रवेश द्वार से आने पर अतिथि सबसे पहले देखते हैं। जहांगीर अकबर का बेटा था और वह मुगल सिंहासन का उत्तराधिकारी भी था। जहांगीर महल का निर्माण अकबर ने महिलाओं के लिए कराया था। यह पत्‍थरों का बना हुआ है और इसकी बाहरी सजावट सादगी वाली है। पत्‍थर के बड़े बाउल पर सजावटी पर्शियन पच्‍चीकारी की गई है, जो संभवतया सुगंधित गुलाब जल को रखने के लिए बनाया गया था। अकबर ने जहांगीर महल के पास अपनी मनपसंद रानी जोधा बाई के लिए एक महल का निर्माण भी कराया था।

शाहजहां द्वार निर्मित पूरी तरह से संगमरमर का बना हुआ खास महल विशिष्‍ट इस्‍लामिक - पर्शियन विशेषताओं का प्रदर्शन करता है। इनके साथ हिन्‍दु विशेषताओं की एक अद्भुत श्रृंखला भी मिश्रित की गई है जैसे कि छतरियां। इसे बादशाह का सोने का कमरा या आरामगाह माना जाता है। खास महल में सफेद संगमरमर की सतह पर चित्र कला का सबसे सफल उदाहरण दिया गया है। खास महल की बांईं ओर मुसम्‍मन बुर्ज है जिसका निर्माण शाहजहां ने कराया था। यह सुंदर अष्‍टभुजी स्‍तंभ एक खुले मंडप के साथ है। इसका खुलापन, ऊंचाइयां और शाम की ठण्‍डी हवाएं इसकी कहानी कहती है। यही वह स्‍थान है जहां शाहजहां ने ताज को निहारते हुए अंतिम सांसें ली थी।

शीश महल या कांच का बना हुआ महल हमाम के अंदर सजावटी पानी की अभियांत्रिकी का उत्‍कृ‍ष्‍टतम उदाहरण है। ऐसा माना जाता है कि हरेम या कपड़े पहनने का कक्ष और इसकी दीवारों में छोटे छोटे शीशे लगाए गए थे जो भारत में कांच मोजेक की सजावट का सबसे अच्‍छा नमूना है। शाह महल के दांईं ओर दीवान ए खास है, जो निजी श्रोताओं के लिए है। यहां बने संगमरमर के खम्‍भों में सजावटी फूलों के पैटर्न पर अर्ध कीमती पत्‍थर लगाए गए हैं। इसके पास मम्‍मम ए शाही या शाह बुर्ज को गरमी के मौसम में उपयोग किया जाता था।

दीवान ए आम का उपयोग प्रसिद्ध मयूर सिंहासन को रखने में किया जाता था, जिसे शाहजहां द्वारा दिल्‍ली राजधानी ले जाने पर इसे लालकिले में ले जाया गया। यह सिंहासन सफेद संगमरमर से बना हुआ उत्‍कृष्‍ट कला का नमूना है। नगीना मस्जिद का निर्माण शाहजहां ने कराया था, जो दरबार की महिलाओं के लिए एक निजी मस्जिद थी। मोती मस्जिद आगरा किले की सबसे सुंदर रचना है। यह भवन वर्तमान में दर्शकों के लिए बंद किया गया है। मोती मस्जिद के पास मीना मस्जिद है, जिसे शाहजहां ने केवल अपने निजी उपयोग के लिए निर्मित कराया था।


                                                         सेंट केथेड्रल


गोवा की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित धार्मिक इमारतों में से यह भव्‍य 16वीं शताब्‍दी का स्‍मारक है, जिसे पुर्तगाल शासन के दौरान रोमन केथोलिक द्वारा बनाया गया था। यह एशिया का सबसे बड़ा चर्च है। यह केथेड्रल एलेक्‍सेंड्रिया के सेंट केथेरिन को समर्पित है, जिनके भोज्‍य दिवस पर 1510 में अल्‍फोंसो अल्‍बूकर्क ने मुस्लिम सेना को पराजित किया और गोवा शहर का स्‍वामित्‍व लिया। अत: इसे सेंट केथेरिन का केथेड्रल भी कहते हैं और यह पुर्तगाल में बने किसी भी चर्च से बड़ा है।

इस केथेड्रल को पुर्तगाली वाइसराय, रिडोंडो ने ''पुर्तगाल के एक विशाल चर्च, जहां संपत्ति, शक्ति और प्रसिद्धि हो, एक ऐसे रूप में स्‍थापित किया था, जो अटलांटिक से प्रशांत महासागर त‍क समुद्र पर कब्‍जा कर सके। इसके विशाल मुक्‍त द्वार का निर्माण 1562 में राजा डोम सेबास्टियो (1557-78) और इसे 1619 में काफी हद तक पूरा‍ किया गया था। यह 1640 में इसे अर्पित किया गया था।

यह चर्च 250 फीट लंबा और 181 फीट चौड़ा है। इसका अगला हिस्‍सा 115 फीट ऊंचा है। यह भवन पुर्तगाली - गोथिक शैली में टस्‍कन बाह्य सज्‍जा तथा कोरिंथयन अंदरुनी सज्‍जा के साथ बनाया गया है। केथेड्रल का बाह्य हिस्‍सा शैली की सादगी के लिए उल्‍लेखनीय है, जबकि इसकी अंदरुनी सजावट अपनी सुंदर भव्‍यता से दर्शकों का मन मोह लेती है।

केथेड्रल के स्‍तंभ गृह में प्रसिद्ध घंटा है जो गोवा में सबसे बड़ा तथा विश्‍व में एक सर्वोत्तम कृति माना जाता है, जिसे बहुधा अपनी शानदार आवाज के लिए ''स्‍वर्ण घंटी'' कहा जाता है। यहां मुख्‍य पूजा स्‍थल अलेक्सेंड्रिया के सेंट केथेरिन को समर्पित है और यहां दोनों ओर लगी तस्‍वीरें उनके जीवन तथा निर्माण के दृश्‍य प्रदर्शित करती हैं।

नेव की दांईं ओर चमत्‍कारों का चेपल ऑफ क्रॉस बना हुआ है। ईसा मसीह की एक झलक इस विशाल, सादे क्रॉस पर 1919 में प्रकट होने का उल्‍लेख है। मुख्‍य पूजा गृह में विशाल सोने का आवरण चढ़े हुए वेदी पटल हैं। सेंट केथेरिन के जीवन के दृश्‍य, जिन्‍हें यह केथेड्रल समर्पित है, इसके 6 मुख्‍य पैनलों पर तराशे गए हैं। बांईं ओर के कक्ष में 1532 के दौरान बपतिस्‍मा के अक्षर बनाए गए हैं। सेंट फ्रांसीस जेवियर के बारे में कहा जाता है कि इसे इबारत को पढ़ कर उन्‍होंने हजारों गोवावासियों का बपतिस्‍मा किया है।

यहां दुनिया भर से हजारों -लाखों लोग आते हैं और इस चर्च को सभी धर्मों के लोगों द्वारा एक धार्मिक स्‍थल माना जाता है। यह गोवा का एक अपरिहार्य पर्यटक आकर्षण है और गोवा जाने पर से' केथेड्रल को देखें बिना वापस आना यात्रा को अधूरा माना जाता है।

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